सन्दर्भ -सामिग्री :
आम तौर पर लोग तेज़ सिर दर्द को हलके में लेते हैं और सोचते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन कई बार सिर दर्द का ताल्लुक अनियमित उच्च रक्तचाप (Hypertension )से भी हो सकता है। माहिरों के मुताबिक़ हो सकता है कई सालों पहले तक आपका रक्त चाप अनियमित रहा हो, और अब यह सिर दर्द के लक्षण के तौर पर सामने आया हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि उच्च रक्त चाप और स्ट्रोक के बीच एक गहरा ताल्लुक देखा गया है।
स्ट्रोक (Cerebral or Brain attack )की आशंका
उच्च रक्त चाप के कारण रक्त नलिकाओं में सूजन आ सकती है ,जिसे एनयूरिज़्म कहते हैं।
Aneurysm: Causes, Symptoms & Diagnosis - Healthline
(हृदय को रक्त ले जाने वाली नाली को आर्टरी या हृद धमनी तथा मुख्य धमनी को आओटा (aorta )कहते हैं।खून उठाने वाली अन्य नालियों को ब्लड वेसिल्स कह दिया जाता है। )
इससे ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है जिसे आम भाषा में दिमाग की नली फटना कह देते हैंऔर जिसमें दिमाग के अंदर -अंदर कम समय में बहुत अधिक रक्तस्राव हो जाता है.स्ट्रोक एक प्रकार का ब्रेन अटेक ही है।
जब मस्तिष्क तक पहुँचने वाले रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है तब स्ट्रोक की आशंका रहती है। उच्च रक्त चाप से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगतीं हैं और ये भी स्ट्रोक की आशंका बढ़ाता है।
बचावी उपाय
एक्टिव रहें सिडेंटरी लाइफ स्टाइल छोड़ें ,जीवन में तनाव कमने के उपाय अपनाएं।
बिलाशक रक्त चाप को दवाओं और जीवनशैली में बदल से नियंत्रित रखा जा सकता है।सामान्य रेंज ११० /७० mm Hg रखा जा सकता है।
हाइपर टेंशन (उच्चरक्तचाप )से ग्रस्त लोगों को अधिक तनाव (Life style stress )और डिप्रेशन (अवसाद ) से बचना चाहिए।ये दोनों ही चीज़ें आधुनिक जीवन की सौगातें ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करती है।
उच्च रक्तचाप से खतरा
स्ट्रोक के लिए उच्चरक्त चाप एकमात्र सबसे बड़ा रिस्क फेक्टर माना जाता है।यह स्ट्रोक के खतरे के वजन को बढ़ाता है। इससे ब्रेन हेमरेज के अलावा हार्टअटैक और अन्य प्रमुख अंगों के भी क्षतिग्रस्त होने डेमेज होने का खतरा रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उच्चरक्तचाप की दशा में उतना ही रक्त उलीचने के लिए दिल को अब पहले से ज्यादा काम करना पड़ता है।
कई बार ब्लडवेसिल्स की अंदर की दीवारें , संकीर्ण होकर सख्त हो जाती हैं।इनका अस्तर कठोर हो जाता है। यह भी सुचारु रूप रक्तसंचार में अवरोध पैदा करता है।
दवा और जीवन शैली :क्लिनिकल (नैदानिक )परीक्षणों से बारहा मालूम हुआ है ,कि हाइपरटेंशन के प्रबंधन में काम में ली जाने वाली दवाएं स्ट्रोक को मुल्तवी रखती हैं स्ट्रोक से बचाये रहतीं हैं और एक प्रकार की बचावी चिकित्सा ही बन जातीं हैं इसीलिए उच्चरक्त चाप की दवाएं नियमित धार्मिकनिष्ठा के साथ खानी चाहिए बिला नागा।
अन्य परीक्षण बतलाते हैं कि ये दवाएं स्ट्रोक के खतरे का वजन ३२ फीसद तक घटा देती हैं।
जीवन में होने वाली घटनाओं के प्रति रुख ,नज़रिये में बदलाव ज़रूरी है घटनाओं के प्रति अपना रवैया एटीट्य्ड बदलिए घटनाओं को नहीं बदला जा सकता है।
रक्तचाप पर करें नियंत्रण के उपाय
(१ )खाने में नमक का प्रयोग कम करें उन चीज़ों में ऊपर से नमक न मिलाएं जो पहले से ही नमकीन हैं।छद्म रूप , गुप्तरूप से भी हमारी खुराक में नमक चला आता है -अचार पापड़ ,चटनी, नमकीन आदि से।
(२ )रोज़ाना की खुराक में जितने प्रकार के फल आप अपनी हैसियत के मुताबिक़ शरीक कर सकतें हैं करें।
(३ )स्केल्स का भी ध्यान रखें साप्ताहिक तौर पर अपना वजन सुबह उठते ही लें।
(४ )भोजन ,रोज़मर्रा के खाने पीने में चिकनाई (वसा )की मात्रा कम रखें।
(५ )चीनी की प्रतिदिन की खपत कम रखें। यह सफेद जहर पोषणमान से शून्य है। कोई पुष्टिकर तत्व नहीं हैं इसमें ,उलटे हमारे शरीर से खनिजों(Minerals ) का सफाया करती है।
(६ )शराब किसी भी प्रकार के एल्कोहल से परहेज रखें अपनी उठ बैठ चेक करें संग का रंग चढ़ता है। शरीरिक रूप से दिन भर सक्रिय रहें किसी न किसी बहाने से उठें - बैठें एक जगह बैठे -बैठे काम करते हैं तो बीच में ब्रेक लेकर दफ्तर के आसपास ही मटरगश्ती करें।
(७ )तनाव जीवन में घटाएं। कुछ समय अपने लिए भी निकालें। नींद पूरी लें उम्र के अनुरूप और समय पर सोएं।
दक्षिण एशिया में स्ट्रोक का खतरा अधिक
एक ब्रिटानी शोध के मुताबिक़ योरोप की तुलना में दक्षिण एशिया में स्ट्रोक से ज्यादा लोग मरते हैं. इसकी वजह पेचीदा हैं अन -अनुमेय हैं जानना इन्हें टेढ़ी खीर है।
दक्षिण एशियाई लोगों में उच्च रक्तचाप ,डायबिटीज़ ,उच्च कोलेस्टेरोल (खून में घुली अतरिक्त चर्बी )का खतरा ज्यादा रहता है। जो स्ट्रोक के खतरे के वजन को भी बढ़ा देता है।
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